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ग्राफ़िक ओर्गनाइज़र्स और इनके प्रकार Pedagogy

कोर्स के बारे में

प्रिय अध्यापकों!

आपने कई बार विज्ञान और पर्यावरण-विज्ञान पढ़ाने वाले अध्यापकों को अपनी कक्षा में डायग्राम, फ्लोचार्ट जैसे चित्र इस्तेमाल करते देखा होगा| लेकिन क्या आपने कभी कल्पना की है कि विज्ञान और पर्यावरण-विज्ञान के साथ-साथ अन्य विषयों में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है? आप सभी जानते हैं कि चित्रों और फ्लोचार्ट जैसी आकृतियों का इस्तेमाल करने से बच्चे विषय को बेहतर समझ पाते है और याद रख पाते हैं| इस कोर्स में आप जानेंगे कि ऐसा क्यों होता है| और साथ-ही-साथ आप अलग-अलग विषयों को पढ़ाने के लिए विभिन्न चित्रों और इन चित्रों को इस्तेमाल करने की तकनीकों के बारे में भी जान पाएंगेमज़े की बात तो यह है कि यह कोर्स सिर्फ़ प्राथमिक या माध्यमिक कक्षा स्तर के अध्यापकों के लिए ही लाभदायक नहीं है बल्कि उच्च माध्यमिक कक्षाओं के अध्यापक भी इसका लाभ उठा सकते हैं| इस कोर्स में हर कक्षा के लिए आपको तकनीकें मिल जाएँगी

 

कोर्स के लेखक 

इस कोर्स को भारत के सभी शिक्षकों तक पहुंचाने की कोशिश पारुल भरद्वाज ने की है| ये स्नातक शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी से और स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस से पूरी कर चुकी हैं|इन्होने एक शिक्षिका के रूप में कई वर्षों तक स्कूल में बच्चों के साथ काम किया है|साथ-ही-साथ इन्हें बच्चों और शिक्षकों के लिए पठन-पाठन सामग्री लिखने का अनुभव भी रहा है|

स्रोत 

  1. NCERT Books

  2. NCF 2005 Curriculum Framework

  3. The Use of graphic organisers to enhance thinking skills in the learning of economics, by Hong Kong Curriculum Development Institute, Education Department, 2001

  4. Q&A: What’s the big deal with graphic organizers? By Edwin Ellis (link: http://docshare01.docshare.tips/files/14022/140226323.pdf, retrieved on 12 Dec, 2017)

  5. The theoretical and empirical basis for graphic organizer Instruction, by Stephen Wills and Edwin Ellis, The University of Alabama (link: http://www.calhoun.k12.al.us/files/makessense%202010/DoNotOpenFolder/Implmnt/DONTOPEN/MSStrats/Stuf/TheoreticBasis.pdf, retrieved on 13 Dec, 2017)

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