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हिज्जे Language

कोर्स  के बारे में

यह कोर्स किस विषय पर है और इसे कौन करें ?

यह कोर्स प्राथमिक कक्षाओं में भाषा पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए उपयोगी है | इस कोर्स में प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के हिज्जे विकास यानी spelling development से जुड़ी समस्याओं और सुझावों पर बातचीत की गयी है | हिज्जे  लेखन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है | सही हिज्जे  हमारे लेख को पाठक के लिए पढ़ना आसान कर देता है |

इस कोर्स के पहले भाग में हम हिज्जे से जुड़ी ग़लतियों के कारणों पर बातचीत करेंगे | दूसरे भाग में हम एक कुशल हिज्जेकार के गुणों के बारे में जानेंगे | बाकी भागों में हम चर्चा करेंगे की अपनी प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की एक कुशल हिज्जेकार बनने में कैसे मदद कर सकते हैं और लेखन में हिज्जे सीखने सिखाने का क्या महत्व है |


यह कोर्स NCERT द्वारा विकसित प्राथमिक कक्षाओं में भाषा के सीखने के प्रतिफलों पर कार्य करने में भी आपकी मदद कर सकता है |आइए जानते हैं कि विभिन्न  कक्षाओं के संदर्भ में वो प्रति-फल कौन से हैं |


प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे :
कक्षा 1, अर्थ की खोज में विविध प्रकार की युक्तियों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे– केवल चित्रों या चित्रों और प्रिंट की मदद से अनुमान  लगाना, अक्षर- ध्वनि संबंध का इस्तेमाल करते हैं , शब्दों को पहचानते हैं | कक्षा 1 लिखना सीखने की प्रक्रिया के दौरान अपने विकासात्मक स्तर के अनुसार चित्रों, आड़ी-तिरछी रेखाओ (कीरम-काट), अक्षर आकृतियों, स्व-वर्तनी (इनं वेंटिड स्पैलिंग) और स्व-नियंत्रित लेखन (कनवैंशनल राइटिंग) के माध्यम से सुनी हुई और अपने मन की बातों को अपने तरीके से लिखने का प्रयास करते हैं।

कक्षा 1, 2
-भाषा में निहित शब्दों और ध्वनियों के साथ खेल का मज़ा लेते हुए लय और तुक वाले शब्द बनाते हैं

- अपनी वर्तनी गढ़ने की प्रवृति को भाषा सिखने की प्रक्रिया का हिस्सा समझ पाते हैं  |

-पढ़ी कहानी, कविताओं आदि में लिपि चिह्नों/शब्दों/वाक्यों आदि को देखकर और उनकी ध्वनियों को सुनकर , समझकर उनकी पहचान करते हैं।

कक्षा 3
-स्वेच्छा से या शिक्षक द्वारा तय गतिविधि‍ के अतंर्गत वर्तनी के प्रति सचेत होते हुए स्व-नियंत्रित लेखन (कनवैंशनल राइटिंग) करते हैं।

कक्षा 4,5

-भाषा  की बारीकियों पर ध्यान देते हुए अपनी भाषा गढ़ते हैं और उसे अपने लेखन में शामिल करते हैं |

-स्वेच्छा से या शिक्षक द्वारा तय  गतिविधि के अंतर्गत लेखन की प्रक्रिया की बेहतर समझ के साथ अपने लेखन को जांचते हैं और लेखन के उद्देश्य और पाठक के अनुसार लेखन में बदलाव करते हैं |

कक्षा 5
-नए शब्दों को चित्र शब्द कोष /शब्दकोश में देखते हैं |



कोर्स के लेखक

इस कोर्स को भारत के सभी अध्यापकों तक पहुँचाने की कोशिश श्रीमती पुष्पा खर्कवाल ने की है| वह  दिल्ली के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक और शिक्षक प्रशिक्षक रह चुकी हैं| आजकल वह द टीचर app में लेखक की तरह काम कर रहीं है |

अगर आप कोर्स की लेखिका से संपर्क करना चाहते हैं तो कोर्स के Discussion Board में लिख सकते हैं|   

 

स्रोत

Faye Bolton, Diane Snowball (1993) ,Teaching Spelling- a practical resource
J Richard Gentry,(1987), Spel--is a four letter word
J Richard Gentry ,Jean Wallace Gillet (1993), Teaching kids to spell
Alen Cheuss, (1995-2003), All is well that spells well
SD Krasen, TD Terrell (1983), Natural Acquisition
Professor Krishan Kumar, (2004), The Child’s Language and The Teacher
Gunderson & Shapiro, 1987, 1988; Clarke, 1988; Stice & Bertrand, 1990, Facts on the Teaching of Spelling
J Richard Gentry (1982 ), Emerging practices
J Richard Gentry (1982) - The reading teacher, An Analysis of Developmental Spelling in "GNYS AT WRK"

 

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