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प्राथमिक शालाओं में साहित्य Language

यह कोर्स प्राथमिक शालाओं के लिए शिक्षकों के लिए कारगर रहेगा| बाल सहित्य जादू की छड़ी की तरह है जो बच्चों को भाषा सीखने तथा बौद्धिक विकास के मार्ग को सुगम करता है। बाल सहित्य ऐसा होना चाहिए जो रोचक ढंग से सहित्य में ज्वंत रूप भर दे। जो बच्चे में जिज्ञासा, रूचि, उत्सुकता तथा पढ्ने के लिए जुझारु बनाए रखे। इस कोर्स में कक्षा में बाल साहित्य को नियमित रूप से और रोज़मर्रा में शामिल करने पर ज़ोर दिया गया है| साथ ही कक्षा में बाल साहित्य को शामिल करने के लिए कुछ ख़ास बातों और गतिविधियों के बारे में भी सुझाव दिए गए हैं|

कोर्स की लेखिका:

श्रीमती उषा मल्हान एक शिक्षिका, लेखिका और कथा श्राविका हैं। वह 13 वर्षों से शिक्षा जगत से जुड़ी हुई हैं। फ़िलहाल वह दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाती हैं| समय के साथ उनमें बाल साहित्य में विशेष रुचि और समझ विकसित हुई है। उन्होंने ब्रिटिश काउन्सिल, एन*सी*ई*आर*टी, करी-मकेर्स, I-discover-i, दिशा इंडिया,Academic height आदि प्रतिष्ठित संगठनो के साथ बाल सहित्य तथा बाल-शिक्षण पर कार्य किया है।

संदर्भ-सूची:
  • Agnihotri, K, R, Multilingualism as a Classroom Resource
  • Kumar, Krishna. (2000), The Child’s Language and the Teacher: A handbook. New Delhi: NBT Publication. 
  • Sinha. Shobha(200), “Acquiring Literacy in School.” Seminar 493, September 2000.Pp.38-42
  • Sinha. Shobha, “Emergent Literacy: An Alternative Approach.
  • Disha Navani and Kamlesh chander Joshi, TLM ज़रूरत या विवशता, सन्दर्भ जुलाई-अक्टूबर 2012
  • Avinandan mukharjee,बच्चों के लिये कितबें चुनना, सन्दर्भ जुलाई-अक्टूबर 2012
  • Mahesh Jharvade, सफर्नमा: एक बाल अखबार का, सन्दर्भ जुलाई-अक्टूबर 2012
  • Krishan Kumar, बचपन की अवधारणा और बाल सहित्य, सन्दर्भ september-अक्टूबर  2016
  • Brijesh sharma,Golu ne padhna sikha, सन्दर्भ september-अक्टूबर  2016
  • किर्ति जयराम, सार्थक और सक्रिय लिखित माहोल विसीत विसित करने का प्रयास , सन्दर्भ जुलाई-अक्टूबर  2008
  • Tizard, Barbara & HaughesLerning at home : play,games, stories and lessons
  • Mathews , John(2003) Drawing and language
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